पितृ पूजन landing Page

पितृबाधा दूर होगी, तभी जीवन में सफलता और खुशहाली बढ़ेगी।

पितृबाधा हटेगी, तरक्की बढ़ेगी|

imageअवंतिका उज्जैन (MP)

imageपितृतोष से मुक्ति

imageआत्मिक शांति प्राप्ति

imageवंश की समृद्धि

imageजीवन में तरक्की

bg-image125 भक्त पहले से ही इस पूजा को आरक्षित कर चुके हैं।

हज़ारों नहीं, लाखों लोगों ने हमारे
साथ बदली अपनी किस्मत।

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bg-image125 भक्त पहले से ही इस पूजा को आरक्षित कर चुके हैं।

हज़ारों नहीं, लाखों लोगों ने हमारे
साथ बदली अपनी किस्मत।

पूजा का उपहार

पितृ पूजा के द्वारा
अनलॉक करें अपनी ऊर्जा

₹11000

18500

पूजा के लाभ

🕉️ पितृ शांति मोक्ष

🌳 सिद्धवट पवित्र पूजन

👨‍👩‍👧‍👦 तीन पीढ़ी तारण

🙏 पुण्य प्राप्ति सुनिश्चित

🍚 पिंड दान विधि

☮️ समृद्धि सुख शांति

🔮 पितृ दोष निवारण

📈 वंश उन्नति समाधान

🪔 पूर्ण विधान सेवा

✨ आशीर्वाद तरक्की सफलता

पूजा के बारे में

पित्र पक्ष में उज्जैन के सिद्धवट, गया कोठा और रामघाट पर तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। इसमें तीन पीढ़ी के पितरों का तर्पण किया जाता है और इसके अलावा कई लाख (उल्लेखित 39 लाख जैसे) पूर्वजों का भी तर्पण कराने की परंपरा है, जो कुल मिलाकर 71 पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसका उद्देश्य पितरों को मोक्ष दिलाना और उनका तर्पण करना होता है। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान विशेष रूप से 16 पिंड (सोडस पिंड) दान किया जाता है, जो मृतकों के मोक्ष के लिए होता है। पूजा विधि में पीतल की थाली और अन्य सामग्री से तर्पण व पिंडदान विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है। अंत में पिंड को नदी में विसर्जित करते हैं ताकि पितरों को पूर्ण शांति मिले

पितृ पूजा के द्वारा
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पूजा के लाभ

🕉️ पितृ शांति मोक्ष

🌳 सिद्धवट पवित्र पूजन

👨‍👩‍👧‍👦 तीन पीढ़ी तारण

🙏 पुण्य प्राप्ति सुनिश्चित

🍚 पिंड दान विधि

☮️ समृद्धि सुख शांति

🔮 पितृ दोष निवारण

📈 वंश उन्नति समाधान

🪔 पूर्ण विधान सेवा

✨ आशीर्वाद तरक्की सफलता

पूजा के बारे में

पित्र पक्ष में उज्जैन के सिद्धवट, गया कोठा और रामघाट पर तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। इसमें तीन पीढ़ी के पितरों का तर्पण किया जाता है और इसके अलावा कई लाख (उल्लेखित 39 लाख जैसे) पूर्वजों का भी तर्पण कराने की परंपरा है, जो कुल मिलाकर 71 पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसका उद्देश्य पितरों को मोक्ष दिलाना और उनका तर्पण करना होता है। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान विशेष रूप से 16 पिंड (सोडस पिंड) दान किया जाता है, जो मृतकों के मोक्ष के लिए होता है। पूजा विधि में पीतल की थाली और अन्य सामग्री से तर्पण व पिंडदान विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है। अंत में पिंड को नदी में विसर्जित करते हैं ताकि पितरों को पूर्ण शांति मिले

Puja Benefits

पितृ शांति

श्राद्ध पक्ष में किए जाने वाले तर्पण और पूजा से पूर्वजों की आत्मा को शांति, तृप्ति और मोक्ष प्राप्त होता है। यह कर्म उनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता दर्शाता है, जिससे पितरों की आत्मा को दिव्य लोक की प्राप्ति होती है

सुख-समृद्धि

पितरों के तर्पण और श्राद्ध से वे प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख, समृद्धि, धन-धान्य एवं स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं। इससे वंश वृद्धि होती है और जीवन में समृद्धि बनी रहती है

पितृ दोष निवारण

श्राद्ध और पिंडदान से पितृ दोष या संबंधित समस्याएं समाप्त होती हैं। इससे जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक-आध्यात्मिक शांति मिलती है

आध्यात्मिक लाभ

यह पूजा न केवल पितरों को मोक्ष दिलाने में मदद करती है, बल्कि यजमान के भी पुण्य-धन और आध्यात्मिक उन्नति का साधन बनती है। यह कर्म भवसागर से मुक्ति का मार्ग है

पूजा लाभ

पितृ शांति

श्राद्ध पक्ष में किए जाने वाले तर्पण और पूजा से पूर्वजों की आत्मा को शांति, तृप्ति और मोक्ष प्राप्त होता है। यह कर्म उनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता दर्शाता है, जिससे पितरों की आत्मा को दिव्य लोक की प्राप्ति होती है

सुख-समृद्धि

पितरों के तर्पण और श्राद्ध से वे प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख, समृद्धि, धन-धान्य एवं स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं। इससे वंश वृद्धि होती है और जीवन में समृद्धि बनी रहती है

पितृ दोष निवारण

श्राद्ध और पिंडदान से पितृ दोष या संबंधित समस्याएं समाप्त होती हैं। इससे जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक-आध्यात्मिक शांति मिलती है

आध्यात्मिक लाभ

यह पूजा न केवल पितरों को मोक्ष दिलाने में मदद करती है, बल्कि यजमान के भी पुण्य-धन और आध्यात्मिक उन्नति का साधन बनती है। यह कर्म भवसागर से मुक्ति का मार्ग है

Process

Maa Baglamukhi Temple

Maa Baglamukhi Mata Temple, MP

प्राचीन काल से उज्जैन पितृपूजा का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है, जहां अनेक महान पात्रों ने अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए पूजा-अर्चना की। रामायण के अनुसार, भगवान श्री राम ने अपने पिता राजा दशरथ की आत्मा की शांति और पितरों की मुक्ति के लिए उज्जैन के पवित्र शिप्रा घाट पर पितृ तर्पण और पिंडदान किया था। यह स्थल तब से पुण्य और धार्मिक महत्व का केंद्र माना गया है।

महाभारत और पुराणों में भी उल्लेख मिलता है कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने वंश के पितरों के उद्धार हेतु उज्जैन में श्रद्धा क्रिया और तर्पण का आयोजन किया था। यह परंपरा उज्जैन में पितृपूजा के महत्व और उसकी पवित्रता को दर्शाती है, जो धार्मिक अनुष्ठान और मोक्ष मार्ग के लिए अनिवार्य माना गया।

इतिहास में महान सम्राट राजा विक्रमादित्य ने भी उज्जैन में अपने कुल और पितरों की शांति के लिए यहाँ बड़े यज्ञ और पितृपूजा करवाई थी। उनकी यह प्रेरणा आज भी उज्जैन में श्रद्धालुओं और परिवारों द्वारा अनुसरित होती है।

शिव पुराण के अनुसार, उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पवित्रता के कारण यहां की पितृपूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पर किया गया पिंडदान और तर्पण पितरों को अखंड शांति प्रदान करता है। इसलिए उज्जैन में पितृपूजा करने का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शीघ्र शांति मिलती है और वंशजों के जीवन में सुख-संपत्ति एवं समृद्धि आती है।

इस प्रकार, उज्जैन की पवित्र धरती पर भगवान राम, कृष्ण एवं राजा विक्रमादित्य जैसे महापुरुषों द्वारा स्थापित पितृपूजा की परंपरा आज भी जीवित है, जो सारे हिन्दू परिवारों के लिए पितृ ऋण निवारण एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। उज्जैन का यह पावन स्थान और उसका महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, पितृकों की मुक्ति और जीवितों की भलाई के लिए अनंत आशीर्वाद प्रदान करता है।

पूजा करने वालों के कुछ शब्द

Frequently Asked Questions

पितृपूजा से पूर्वजों को शांति और मोक्ष मिलता है। इससे पितृ दोष समाप्त होता है, परिवार में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह पूजा धार्मिक कर्तव्य होने के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी है

हाँ, ऑनलाइन पूजा भी प्रभावशाली होती है यदि वह सही विधि और मंत्रों के साथ संपन्न हो। इससे पितरों को पूजा का फल प्राप्त होता है और ग्रहदोषों का प्रभाव कम होता है

यदि गोत्र या जन्म नक्षत्र ज्ञात नहीं है तो भी पितृपूजा की जा सकती है। तर्पण और श्राद्ध जैसे अनुष्ठान जनरल विधि से कराए जाते हैं, जो पितरों की शांति में सहायक होते हैं

पूजा के दिन शुद्ध और साफ वस्त्र पहनें, शांत मन से यज्ञ या श्राद्ध करें। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान अपने पितरों को स्मरण करें और विधि-निष्ठा से आचरण करें

पूजा का असर व्यक्ति की श्रद्धा, कर्म और ग्रह स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर पूजा के बाद कुछ ही दिनों से लेकर 30 दिनों के भीतर सकारात्मक प्रभाव अनुभव होते हैं

Frequently Asked Questions

पितृपूजा से पूर्वजों को शांति और मोक्ष मिलता है। इससे पितृ दोष समाप्त होता है, परिवार में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह पूजा धार्मिक कर्तव्य होने के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी है

हाँ, ऑनलाइन पूजा भी प्रभावशाली होती है यदि वह सही विधि और मंत्रों के साथ संपन्न हो। इससे पितरों को पूजा का फल प्राप्त होता है और ग्रहदोषों का प्रभाव कम होता है

यदि गोत्र या जन्म नक्षत्र ज्ञात नहीं है तो भी पितृपूजा की जा सकती है। तर्पण और श्राद्ध जैसे अनुष्ठान जनरल विधि से कराए जाते हैं, जो पितरों की शांति में सहायक होते हैं

पूजा के दिन शुद्ध और साफ वस्त्र पहनें, शांत मन से यज्ञ या श्राद्ध करें। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान अपने पितरों को स्मरण करें और विधि-निष्ठा से आचरण करें

पूजा का असर व्यक्ति की श्रद्धा, कर्म और ग्रह स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर पूजा के बाद कुछ ही दिनों से लेकर 30 दिनों के भीतर सकारात्मक प्रभाव अनुभव होते हैं